Skip to main content

इलाहाबाद के एक विधायक राजू पाल की अतीक अहमद के गुंडों ने हत्या की थी (सन 2005)। अतीक अहमद समाजवादी पार्टी से उस समय सांसद थे। उसके कुछ साल बाद राजू पाल की विधवा पूजा पाल बसपा के टिकट से अपने पति के हत्यारोपी अशरफ(अतीक अहमद के भाई) को हराकर विधायक बनी थीं। जनता ने इमोशनल होकर उनको थोक में वोट दिया था (सन 2007)। अब खबर ये आई है कि पूजा पाल फिलहाल उसी समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद का चुनाव लड़ रही हैं जिसके सांसद ने उसके पति की सरेआम हत्या करवाई थी (सन 2019)। जब पति के हत्यारों से हमारे राजनीतिज्ञ समझौता कर सकते हैं तो आप समझ लीजिए देश के साथ वो क्या करेंगे? सत्ता चीज ही ऐसी है जिसका चश्का एक बार लग जाये तो रिश्ते तक बेमानी हो जाते हैं...

बाकी जनता का क्या है? उसके माथे पर तो कैपीटल C लिखा ही हुआ है।

Comments

Popular posts from this blog

भारत और आतंकवाद

भारत सरकार (फिर चाहे सत्ता में कोई भी हो) या तो खुद को धोखे में रखना चाहती है या फिर देश की जनता को आतंकवाद के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हल्ला करके कुछ हासिल नहीं होने वा...

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-त्याग पुरूष

श्रीराम ऐसा क्या था उस इंसान में जिसके जाने के हजारों साल बाद भी उनके देश के लोग उन्हें याद करते है। अयोध्या में जन्मे इस महापुरुष को क्यों मर्यादा पुरुषोत्तम अर्थात सभी पुरुषों में सबसे उत्तम क्यों कहा जाता है ?क्यों सारी दुनिया इस इंसान के अयोध्या लौटने के दिन पर खुशियां मानती है? श्रीराम की ज़िंदगी पूरी तरह त्याग,संघर्ष और बहुत निराशाओं से भरी थी फिर भी उन्हें अब तक का सबसे अच्छा राजा माना जाता है,और रामराज्य एक पैमाना बन गया किसी राज्य  की खुशहाली को मापने का। पर इन सभी उपलब्धियों ,प्यार और प्रसिद्धि के पीछे उस इन्सान को बहुत सी चीज़े त्यागनी पड़ी और बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा,जिसका सामना उन्होंने बहुत ही बहादुरी से किया जो उनकी बहादुरी को दर्शाता है। श्रीराम अपने परम पूजनीय पिता दशरथ से बहुत ही ज्यादा प्रेम करते थे ,दशरथ भी अपने लाड़ले राम उतना ही प्यार करते थे।श्रीराम जब अयोध्या के युवराज थे और बस राजा बनने ही वाले थे तो बस अपने पिता को दिए वचन को पूरा करने के लिए वो 14 साल के वनवास पर चले गए।शास्त्रो और वेदों का ज्ञान था उन्हें सभी योद्धाओ में महान थे।दिखने में सबसे...

कबीर सिंह

शहीद कपूर की फिल्म कबीर सिंह को लेकर मीडिया में जिस प्रकार की खबरें आ रही हैं हालांकि मैंने फिल्म देखा नहीं और शहीद कपूर जैसे कलाकारों की फिल्में थिएटर तो क्या यूट्यूब पर मुफ्त में देखने के पहले भी सोचना पड़ता है खैर ! तो जिस तरह का कथानक है फिल्म का, जैसा कि बताया जा रहा है और जिस ढंग से फिल्म अब तक कमा चुकी है उससे तो यही समझ आता है कि हमारा समाज सड़ चुका है वैसे इसके पहले भी संजय दत्त पर बनी फिल्म की कमाई ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय समाज किस हद तक मानसिक दिवालिएपन का शिकार हो चुका है खैर ! मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि यदि आप भी ऐसी फिल्मों के दर्शक हैं तो यकीन मानिए आपकी मानसिक अवस्था भी ठीक नहीं है कुछ दिन शांति से अपने परिवार वालों के साथ समय बिताएँ अच्छी किताबें पढ़ें सही-गलत पर विचार करना शुरू करें क्यूंकि आपका दिमाग अब कूड़ादान बन चुका है जिसे साफ करने की जरूरत है